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लड़के स्कूली शिक्षा में लड़कियों से पिछड़े, यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट का दावा

लड़के स्कूली शिक्षा में लड़कियों से पिछड़े, यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट का दावा

यूनेस्को की रिपोर्ट का दावा, 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल से दूर

लड़कियों के मुकाबले लड़कों के एक ही कक्षा में दोबारा पढ़ने की संभावना अधिक: यूनेस्को



उच्च माध्यमिक कक्षाओं में भी लड़कों की संख्या कम

● 57 देशों में पढ़ पाने के कौशल में 10 वर्ष की उम्र के लड़के लड़कियों की तुलना में पीछे।

● 73 देशों में उच्च माध्यमिक कक्षाओं में लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या कम।

● 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षां में फिर अधिक पढ़ने की संभावना।


नई दिल्ली : लड़कियों की तुलना में लड़कों के एक ही कक्षा दोहराने की संभावना ज्यादा होती है। शारीरिक रूप से दंडित किए जाने का खतरा भी लड़कों को ही अधिक होता है। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की एक वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 142 में से 130 देशों में ये हालात पाए गए हैं।



‘लीव नो चाइल्ड बिहाइंड : ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेज्मेन्ट फ्रॉम एजुकेशन’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है, प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पढ़ने की आयु वाले करीब 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। रिपोर्ट में शिक्षा से लड़कों के इस तरह के अलगाव के पीछे कड़े अनुशासन, शारीरिक दंड, गरीबी और काम करने की आवश्यकता को कारण बताया गया है।


गरीबी भी वजह: गरीबी और घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत लड़कों को स्कूल से दूर करती है। इन वजहों से लड़कियों के कभी स्कूल नहीं जा पाने की अधिक आशंका होती है, लेकिन लड़कों के आगे की कक्षाओं में नहीं पढ़ पाने और अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाने का खतरा अधिक है।



नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की नई 'वैश्विक शिक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षाओं में दोबारा पढ़ने की संभावना अधिक है। 'लीव नो चाइल्ड बिहाइंड: ग्लोबल रिपोर्ट ऑन बॉयज डिसेन्गेजमेंट फ्रॉम एजुकेशन' शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल में पढ़ने की आयु वाले करीब 13 करोड़ 20 लाख लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि शारीरिक तौर पर लड़कियों के मुकाबले लड़कों को परेशान किए जाने का खतरा अधिक होता है। इसमें कहा गया है कि 130 देशों में लड़कियों की तुलना में लड़कों के प्राथमिक कक्षाओं में फिर से पढ़ने की अधिक संभावना है और ये आंकड़े स्कूल में आगे की कक्षाओं में जाने की उनकी खराब गति की ओर इशारा करती है।


लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार अब भी दूर
लड़कों के लिए शिक्षा का अधिकार का ध्येय अब तक पूरा नहीं हुआ है। काफी बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर प्राथमिक और सेकेंडरी स्कूल से बाहर हैं। कोरोना महामारी ने पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या और तेजी से बढ़ाई है। 2020 में महामारी के पहले स्कूल में 25 करोड़ 90 लाख बच्चे थे, जिनमें से 13 करोड़ 20 लाख लड़के थे।



source http://www.primarykamaster.in/2022/04/blog-post_11.html

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