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उच्च शिक्षा का हर कोर्स दिखाएगा रोजगार की राह, UGC ने नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट किया तैयार

उच्च शिक्षा का हर कोर्स दिखाएगा रोजगार की राह, UGC ने नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट किया तैयार


यूजीसी अब उच्च शिक्षा से जुड़े सभी कोर्सों को कुछ ऐसा डिजाइन कर रहा है जिसमें डिग्री के साथ साथ कौशल का भी प्रशिक्षण मिलेगा। यह प्रशिक्षण उसी कोर्स या क्षेत्र से संबंधित होगा जिसमें युवा पढ़ाई कर रहे हैं।


नई दिल्ली । हर-पढ़े लिखे और युवा को रोजगार मुहैया कराने की राह थोड़ी आसान हो सकती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( यूजीसी) अब उच्च शिक्षा से जुड़े सभी कोर्सों को कुछ इस तरह डिजाइन कर रहा है, जिनमें डिग्री के साथ-साथ कौशल का प्रशिक्षण भी मिलेगा। यह उसी कोर्स या क्षेत्र से संबंधित होगा, जिसमें छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट जैसे सभी स्तर के कोर्स शामिल हैं।



सभी कोर्सों की पढ़ाई होगी शुरू
माना जा रहा है कि नए शैक्षणिक सत्र यानी वर्ष 2022-23 से इन मानकों के अनुरूप स्नातक से लेकर परास्नातक स्तर के सभी कोर्सों की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। यूजीसी ने इस बीच नेशनल हायर एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ) में बदलाव से जुड़ा एक ड्राफ्ट (मसौदा) तैयार किया है।


प्रत्येक कोर्स के नए मानक भी तय
यही नहीं यूजीसी ने प्रत्येक कोर्स के नए मानक भी तय किए गए हैं। फिलहाल इस ड्राफ्ट पर यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से 13 फरवरी तक सुझाव मांगे हैं। कोर्सो में बदलाव और उसे 21वीं सदी की जरूरत को देखते हुए रोजगारपरक बनाने की सिफारिश नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई थी जिसे अब अमल में लाया जा रहा है।


सभी कोर्स एक क्रेडिट से लिंक
माना जा रहा है कि इन कोर्सों को पढ़कर निकलने वाले छात्रों को इस तरह से तैयार किया जाएगा कि उनके पास पढ़ाई पूरी करने के बाद संबंधित क्षेत्र में जाने का विकल्प मौजूद रहे। जिन अहम बदलावों को ड्राफ्ट में शामिल किया है, उनमें सभी कोर्सों को एक क्रेडिट से लिंक किया गया है।


कभी भी पढ़ाई शुरू करने का मिलेगा मौका
जिसमें अंडर-ग्रेजुएट सर्टिफिकेट कोर्स का क्रेडिट स्कोर 40 होगा जबकि अंडर-ग्रेजुएट डिग्री कोर्स का क्रेडिट स्कोर 80 होगा। बैचलर डिग्री कोर्स का क्रेडिट स्कोर 120 होगा। इस क्रेडिट स्कोर से छात्रों को बीच में कभी भी पढ़ाई छोड़ने और फिर से शुरू करने का मौका मिलेगा।


सीधे पीएचडी में मिलेगा दाखिला
इस व्यवस्था में क्रेडिट स्कोर एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) में जमा रहेंगे। जिन छात्रों की शुरुआत से ही शोध के क्षेत्र में रुचि है, उनके लिए चार साल का बैचलर डिग्री (रिसर्च) नाम से अलग कोर्स होगा। इसके बाद वे सीधे पीएचडी में दाखिल ले सकेंगे।


सात सीजीपीए लाना जरूरी
हालांकि पीएचडी में दाखिला के लिए सामान्य बैचलर डिग्री कोर्स के तीसरे वर्ष में कम से कम सात सीजीपीए (क्यूमूलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज) लाना जरूरी होगा। इन सभी कोर्सो में उस क्षेत्र से जुड़ी जरूरत के मुताबिक कौशल प्रशिक्षण भी मिलेगा जो प्रत्येक सेमेस्टर में न्यूनतम 15 घंटे का होगा।


कोर्सों को कौशल के साथ जोड़
इसके साथ ही प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम 30 घंटे की इंटर्नशिप या फिर सोशल एक्टिविटी जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। यूजीसी ने उच्च शिक्षा के प्रस्तावित इस नए ड्राफ्ट में उच्च शिक्षा के कोर्सों को कौशल व व्यवसायिक शिक्षा के साथ जोड़ दिया है। अभी सामान्य स्नातक कोर्सों में इस तरह का प्रशिक्षण या इंटर्नशिप शामिल नहीं है।



source http://www.primarykamaster.in/2022/02/ugc.html

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